रविवार, 19 जुलाई 2015

शार्ट फिल्मों का जादूगर - रतीराम कैमया


राजधानी में 1988 से अब तक बना चुके हैं कई फिल्में

- राजकुमार सोनी



 भोपाल। राजधानी में जहां बड़े-बड़े नामी-गिरामी फिल्म निर्माता व डायरेक्टर कई फिल्मों व सीरियल की शूटिंग कर रहे हैं वहीं साधारण परिवार में जन्म लेने सामान्य कद-काठी सा दिखने वाले इस इंसान को देखकर ऐसा नहीं लगता कि राजधानी में दर्जनों शॉर्ट फिल्में, भोजपुरी व हिन्दी फिल्में बनाई होंगी। ऐसे शख्स का नाम है - रतीराम कैमया। रतिराम कैमया अपने खुद के प्रॉडक्शन हाउस 'कृष्णा ओ कृष्णा आर्टसÓ के बैनर तले फिल्में, सीरियल बनाते हैं जो प्रदेश से लेकर बॉडीवुड तक चर्चाओं में हैं।

1988 से आए फिल्मों में
कैमया ने अभिनय की दुनिया में 1988 से कदम रखा। उन्होंने पहली फिल्म 'असली एनकाउंटरÓ में बतौर एक्टर काम किया। यह फिल्म निर्माता सुरजीत सबरवाल द्वारा डीबीसी फिल्म के बैनर तले बनी थी। बाद में रतिराम ने सुरजीत सबरवाल से स्क्रीन राइटिंग, प्ले निर्देशन व एक्टिंग का काम सीखा। बाद में 1993 में मप्र की टीम को लेकर कृष्णा ओ कृष्णा (फिल्म) आटर्स नामक संस्था का गठन किया। 1994 में इसी बैनर तले पहली पहली फिल्म 'आभासÓ का निर्माण किया जो 25 मिनट की थी। फिल्म का निर्देशन रामप्रसाद शर्मा ने किया। जबकि मुख्य कलाकार राजेंद्र श्रीवास्तव, अभिनेत्री अनीजा केशवान, पिता की भूमिका रतिराम कैमया ने निभाई। इसमें लगभग आधा दर्जन स्थानीय कलाकारों ने भूमिका निभाई।

भोजपुरी लोकगीतों की ओर रुख
रतिराम कैमया ने 2006-7 में भोजपुरी लोकगीतों की तरफ रुख किया जिसमें पहला एलबम 'उड़ल गोरी के लहंगाÓ बाजार में आया। इसमें सह निर्देशक व कलाकार के रूप में साधू , फकीर व एक किसान की भूमिका का अभिनय किया गया। 2007-08 में 'कॉलेज जा ली गोरियाÓ में डॉक्टर व डाकिया की भूमिका निभाई। इसी तरह 2008-09 में तीसरा एलबम 'हाजीपुर के केराÓ व 2009-10 में 'आवा भौजी डालब तह पे रंगÓ आया। यह एलबम होली के 8 गानों पर आधारित है। दोनों एलबम के गायक व संगीतकार मोहम्मद रहीमउद्दीन हैं। इसी कड़ी में 2011 में फिल्म फेस्टीवल हेतु 20 मिनट की हिन्दी फिल्म 'चाहते जोÓ भोपाल में निर्माण की गई, साथ ही 2012 में फिल्मी चक्कर 25 मिनट की फिल्म फेस्टीवल में दी गई। इन फिळ्मों को मप्र के फिल्म फेस्टीवल में अवार्ड से सम्मानित किया गया।  वर्ष 2014 में दो मिनट की डंकिंग ड्राइव पर एक एड फिल्म का निर्माण किया गया जो प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए भेजी गई है।

शीघ्र आएगा एलबम
कृष्णा ओ कृष्णा प्रॉडक्शन के बैनर तले शीघ्र ही पांचवां एलबम 'बेटी कैसे होई शादीÓ (सात भोजपुरी लोकगीत) आएगा। जिसकी शूटिंग भोपाल व आसपास के चुनिंदा इलाकों में होगी। इसके बाद दो घंटे की एक फिल्म 'अभी प्यार बाकी हैÓ (लव स्टोरी व मारधाड़) पर आधारित है का निर्माण 2016 में किया जाएगा। इसके लिए हीरो-हीरोइन की तलाश की जा रही है।

शार्ट फिल्मों की मांग ज्यादा
बाडीवुड-हॉलीवुड में अब शार्ट फिल्मों की डिमांड ज्यादा होने लगी है। सोशल मीडिया के तहत फेसबुक, यू-ट्यूब, पिकासा, ट्यीटर आदि साइटों पर प्रचलन तेजी से बढऩे से हर कोई इसी पर लाइक कर रहा है। कैमया ने बताया कि शार्ट फिल्में 2 से 15 मिनट तक की बनाई जा रही हैं जो सामाजिक बुराइयों, रूढि़वादी परंपराओं, सामाजिक कुरीतियों को दूर करने, समाज में बदलाव लाने व गरीबी, नशा से मुक्ति दिलाने जैसे विषयों को प्राथमिकता से लिया जा जाता है। हर बेटा-बेटी शिक्षित होकर आगे बढ़े ऐसी शार्ट फिल्मों को खूब पसंद किया जा रहा है।

Ratiram kemya

गुरुवार, 22 जनवरी 2015

मप्र के राज्यपाल रामनरेश यादव से पत्रकार प्रवीण श्रीवास्तव व राजकुमार सोनी की सौजन्य भेंट



भोपाल। मिशन फॉर मदर के संचालक प्रवीण श्रीवास्तव व पत्रकार राजकुमार सोनी ने 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे मप्र के राज्यपाल रामनरेश यादव से राजभवन में सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर राज्यपाल को मां कविता संग्रह व तस्वीर भेंट की गई। राज्यपाल रामनरेश यादव ने मिशन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए मिशन के उज्जवल भविष्य की कामना की। राज्यपाल ने अपने माता-पिता के रोच संस्मरण भी सुनाए।




शुक्रवार, 28 मार्च 2014

सूर्य व शुक्र बनवाएंगे मोदी को पीएम





प्रधानमंत्री पद पर पहुंचने के लिए महिला शक्ति होगी मददगार

- राजकुमार सोनी

मई में गुजरात के सीएम नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर सत्तासीन होंगे। मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री पद तक पहुंचाने में किसी खास महिला का योगदान होगा। ऐसा योग सूर्य व शुक्र ग्रह से बन रहा है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी के ज्योतिषीय आकलन दृष्टिकोण से मप्र के प्रमुख भविष्यवक्ताओं व ज्योतिषियों से अबकी बार किसकी सरकार और कौन बनेगा प्रधानमंत्री के बारे में बात की। इन प्रकांड विद्वानों का कहना है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा को सर्वाधिक सीटें हासिल होंगी और एनडीए की सरकार के मुखिया इस बार लालकृष्ण आडवाणी की बजाय गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी होंगे। लोकसभा में एनडीए को 250 से 275 सीटें मिलेंगी जबकि यूपीए को 80 से 110 सीटें ही मिल पाएंगी।

इंदौर के लालकिताब विशेषज्ञ एवं भविष्यवक्ता पं. आशीष शुक्ला के अनुसार शनि शत्रु राशि में होकर चतुर्थ पर पूर्ण दृष्टि रखने से जनता के बीच प्रसिद्ध बना रहा है। भारत की अधिकांश जनता भावी प्रधानमंत्री के रूप में देख रही है। दशमेश बुध एकादशेश के साथ है। दशमेश सूर्य, केतु से भी युक्त है। सूर्य का महादशा में लग्नेश मंगल का अन्तर चल रहा है जो दशमेश होकर लाभ भाव में व मंगल स्वराशि का होकर लग्न में है। यह समय भाजपा को उत्थान की ओर लेजाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बन जाएंगे। पं. शुक्ल ने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी का योग प्रधानमंत्री बनने का नहीं है।
सागर के ज्योतिषाचार्य एवं अंक शास्त्री पं. पीएन भट्ट के अनुसार नरेन्द्र मोदी की जन्म राशि वृश्चिक है। शनि की साढ़े साती का प्रथम चरण चल रहा है। राजभवन में विराजे शुक्र में पराक्रमेश शनि की अन्तर्दशा में गुजरात के मुख्यमंत्री बने। 02.12.2005 को शुक्र की महादशा के बाद राज्येश सूर्य की महादशा जो 03.02.2011 तक चली। तत्पश्चात् 03.02.2011 से भाग्येश चन्द्र की महादशा का शुभारम्भ हुआ। ज्योतिष ग्रंथों में वर्णित है कि एक तो भाग्येश की महादशा जीवन में आती नहीं है और यदि आ जाए तो जातक रंक से राजा तथा राजा से महाराजा बनता है।  मोदी भाग्येश की महादशा में मुख्यमंत्री से प्रधानमंत्री बन सकते हैं, किन्तु चन्द्रमा में राहु की अन्र्तदशा ग्रहण योग बना रही है तथा 20 अप्रैल से 20 जुलाई 2014 के मध्य व्ययेश शुक्र की प्रत्यन्तर दशा कहीं प्रधानमंत्री पद तक पहुंचने के प्रबल योग को ण न कर दें? यद्यपि योगनी की महादशा संकटा में सिद्धा की अन्तर्दशा तथा वर्ष कुण्डली में वर्ष लग्न जन्म लग्न का मारक भवन (द्वितीय) होते हुए भी मुंथा पराक्रम भवन में बैठी है तथा मुंथेश शनि अपनी उच्च राशि का होकर लाभ भवन में विराजमान है। जो अपनी तेजस्वीयता से जातक को 7 रेसकोर्स तक पहुंचा सकता है। किन्तु एक अवरोध फिर भी शेष है और वह है सर्वाष्टक वर्ग के राज्य भवन में लालकृष्ण आडवानी और राहुल गांधी की तुलना में कम शुभ अंक अर्थात् 27.  साथ ही ''मूसल योग'' जातक को दुराग्रही बना रहा है तथा केमद्रुम योग, जो चन्द्रमा के द्वितीय और द्वादश में कोई ग्रह न होने के कारण बन रहा है। उसका फल भी शुभ कर्मों के फल प्राप्ति में बाधा। वर्तमान में भाग्येश चन्द्रमा की महादशा चल रही है, जो दिल्ली के तख्ते ताऊस पर  मोदी की ताजपोशी कर तो सकती है किन्तु केमद्रुम योग तथा ग्रहण योग इसमें संशय व्यक्त करता नजर आ रहा है? 
ग्वालियर के भविष्यवक्ता पं. एचसी जैन ने बताया कि नरेंद्र मोदी की कुंडली में केन्द्र का स्वामी केन्द्र में होकर त्रिकोण के साथ लक्ष्मीनारायण योग बना रहा है। यह योग कर्म क्षेत्र को धनवान बनाने में समर्थ है। यही कारण है कि नरेंद्र मोदी की ख्याति विरोध के बावजूद लगातार बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि लोकसभा में एनडीए को 250 से 275 सीटें मिलेंगी जबकि यूपीए को 80 से 110 सीटें ही मिल पाएंगी। जैन ने बताया कि मोदी को प्रधानमंत्री बनवाने में किसी खास महिला का विशेष योगदान रहेगा।


 


जन्मकुंडली : नरेन्द्र मोदी
जन्म दिनांक : 17 सितम्बर, 1950
जन्म समय : 11 बजे प्रात:
जन्म स्थान: मेहसाना (गुजरात)   

रविवार, 8 दिसंबर 2013

जन जन के शिवराज सिंह चौहान



मध्य प्रदेश में लगातार तीसरी बार विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाने जा रही बीजेपी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक सफल प्रशासक के साथ ही बेहद विनम्र और मिलनसार राजनेता के रूप में पहचाना जाता है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से 1972 में संपर्क में आए चौहान ने 1975 में आपातकाल के आंदोलन में भाग लिया और भोपाल जेल में निरूद्ध रहे. भाजयुमो के प्रांतीय पदों पर रहते हुए उन्होंने विभिन्न छात्र आंदोलनों में भी हिस्सा लिया.

शिवराज की हैट्रिक
उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री के बतौर 29 नवंबर 2005 को पहली बार शपथ लेने वाले चौहान यहां लगातार दूसरी बार 2008 में भी मुख्यमंत्री रहे और पार्टी की घोषणा के अनुसार चौदहवीं विधानसभा में बहुमत पाकर सरकार में आने पर वह लगातार तीसरी बार इस पद की शपथ लेने जा रहे हैं.

1990 में पहली बार बने विधायक
चौहान वर्ष 1990 में पहली बार बुदनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने थे. इसके बाद 1991 में अटल बिहारी वाजपेयी ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें से उन्होंने लखनऊ सीट को रखा था और विदिशा से इस्तीफा दे दिया था. विदिशा में पार्टी ने शिवराज को प्रत्याशी बनाया और वह वहां से पहली बार सांसद बने.

सीहोर जिले में हुआ जन्म
सीहोर जिले के जैत गांव में पांच मार्च 1959 को जन्मे 54 वर्षीय चौहान की संगीत, अध्यात्म, साहित्य एवं घूमने-फिरने में विशेष रूचि है. उनकी पत्नी साधना सिंह हैं और उनके दो पुत्र हैं. उनकी शैक्षणिक योग्यता कला संकाय से स्नातकोत्तर है.

कई अहम समितियों के सदस्य भी रहे
चौहान 1991-92 में अखिल भारतीय केसरिया वाहिनी के संयोजक और 1992 में अखिल भारतीय जनता युवा मोर्चा के महासचिव बने. वर्ष 1992 से 1994 तक बीजेपी के प्रदेश महासचिव नियुक्त होने के साथ ही वह वर्ष 1992 से 1996 तक मानव संसाधन विकास मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति, 1993 से 1996 तक श्रम और कल्याण समिति तथा 1994 से 1996 तक हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य रहे. ग्यारहवीं लोकसभा में वर्ष 1996 में वह विदिशा संसदीय क्षेत्र से दोबारा सांसद चुने गये. सांसद के रूप में 1996-97 में वह नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति, मानव संसाधन विकास विभाग की परामर्शदात्री समिति तथा नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति के सदस्य रहे.

विदिशा में शिवराज का जबरदस्त जनसमर्थन
वर्ष 1998 में वह विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार बारहवीं लोकसभा के सदस्य चुने गये. वह 1998-99 में प्राक्कलन समिति के सदस्य रहे. 1999 में वह विदिशा से लगातार चौथी बार तेरहवीं लोकसभा के लिए एक बार फिर चुने गए और 1999-2000 में कृषि समिति के सदस्य तथा 1999-2001 में सार्वजनिक उपक्रम समिति के सदस्य रहे.

पार्टी की युवा इकाई को किया मजबूत
साल 2000 से 2003 तक भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने पार्टी की युवा इकाई को मजबूत करने के लिए मेहनत की. इस दौरान वे सदन समिति (लोकसभा) के अध्यक्ष और बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव भी रहे. वह 2000 से 2004 तक संचार मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति के सदस्य रहने के साथ ही पांचवीं बार विदिशा से चौदहवीं लोकसभा के सदस्य निर्वाचित हुए.

वह वर्ष 2004 में कृषि समिति, लाभ के पदों के विषय में गठित संयुक्त समिति के सदस्य, बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव, बीजेपी संसदीय बोर्ड के सचिव, केन्द्रीय चुनाव समिति के सचिव और नैतिकता विषय पर गठित समिति के सदस्य और लोकसभा की आवास समिति के अध्यक्ष रहे.

2005 में बने सीएम
वर्ष 2005 में चौहान मध्यप्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष नियुक्त किए गए और उन्हें 29 नवंबर 2005 को उमा भारती और बाबूलाल गौर के बाद पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई.

विकास और स्वच्छ छवि के लिए लोकप्रिय

प्रदेश की तेरहवीं विधानसभा के निर्वाचन में चौहान ने बीजेपी के स्टार प्रचारक की भूमिका का बखूबी निर्वहन कर पार्टी को लगातार दूसरी बार विजय दिलाई. उन्हें 10 दिसंबर 2008 को पार्टी के 143 सदस्यीय विधायक दल ने सर्वसम्मति से नेता चुना और उन्होंने 12 दिसंबर 2008 को भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित सार्वजनिक समारोह में मुख्यमंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण की. विकास और स्वच्छ छवि के लिए मध्य प्रदेश की जनता में लोकप्रिय शिवराज ने लगातार तीसरी बार बीजेपी को जीत दिलाई है.

बुधवार, 27 नवंबर 2013

भविष्यवाणी : भाजपा को 117 से 125 सीटें मिलेंगी




मप्र में सूर्य लगवाएगा भाजपा की हैट्रिक
कांग्रेस को मिलेंगी 85 से 100 सीटें
- राजू स्वर्णकार
भोपाल।
सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में आने से 25 नवंबर को हुए जबरदस्त मतदान की वजह से प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी हैट्रिक लगाकर एक नया इतिहास रचने जा रही है। 50 वर्षों के इतिहास में कोई भी सरकार मप्र में 10 साल से अधिक कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई लेकिन इस बार यह इतिहास पहली बार लिखा जाएगा। वहीं कांग्रेस में एक जुटता एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान सौंपे जाने से इस बार कांग्रेस की सीटें बढ़कर 85 से 100 तक पहुंच जाएंगी।
लालकिताब विशेषज्ञ एवं प्रसिद्ध भविष्य वक्ता पंडित आशीष शुक्ल, इंदौर  ने दावा किया कि चंद्र-मंगल की युति व ग्रहों के राजा सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करने से भारतीय जनता पार्टी को मतदाताओं का सीधा लाभ मिल रहा है। 16 नवंबर को सूर्य के राशि परिवर्तन से भाजपा को 117 से 125 सीटें प्राप्त कर मध्यप्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि 10 साल से वनबास काट रही कांग्रेस पार्टी को भी इस बार 2008 में मिली 71 सीटों की तुलना में 20 से 30 सीटों का फायदा मिलेगा। कांग्रेस को इस बार 90 से 100 सीटें मिलेंगी।
चैतन्य भविष्य जिज्ञासा शोध संस्थान भोपाल के संचालक आचार्य पंडित राज के अनुसार विधानसभा में इस बार कांग्रेस-भाजपा में कांटे के  मुकाबले के तहत भारतीय जनता पार्टी अंतत: सरकार बनाने में कामयाब हो जाएगी। चंद्र-मंगल व सूर्य के शुभ प्रभाव से सत्तादल भाजपा को अच्छा लाभ मिलेगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंन्द्र का कहना है कि यही मतदान अगर 25 नवंबर की तुलना में 15 नवंबर के आसपास होता तो कांग्रेस को 140 से 145 सीटें मिल सकती थीं। क्योंकि तुला राशि का सूर्य सत्तासीन सरकार के लिए लाभदायक नहीं होता। चूंकि सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश होने से इसका लाभ भाजपा सरकार को मिलेगा। भाजपा को इस बार 120 से 125 सीटें मिलेगी जबकि कांग्रेस 85 से 95 सीटों तक सिमट कर रह जाएगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु राजौरिया के अनुसार चंद्र, मंगल व सूर्य के प्रबल योग से सत्तासीन भाजपा सरकार तीसरी बार सरकार बनाकर आम लोगों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाएगी। उन्होंने कहा कि  हालांकि कांग्रेस इस बार विपक्ष की भूमिका आक्रमक रूप में अपनाएगी जिससे नई सरकार को कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन अंततोगत्वा सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।

मंगलवार, 26 नवंबर 2013

मप्र में सूर्य लगवाएगा भाजपा की हैट्रिक





  • सत्तासीन दल को 117 से 125 सीटें मिलेंगी
  • कांग्रेस को मिलेंगी 85 से 100 सीटें

 

- राजू स्वर्णकार
भोपाल। सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में आने से 25 नवंबर को हुए जबरदस्त मतदान की वजह से प्रदेश में पहली बार भारतीय जनता पार्टी हैट्रिक लगाकर एक नया इतिहास रचने जा रही है। 50 वर्षों के इतिहास में कोई भी सरकार मप्र में 10 साल से अधिक कार्यकाल पूरा नहीं कर पाई लेकिन इस बार यह इतिहास पहली बार लिखा जाएगा। वहीं कांग्रेस में एक जुटता एवं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को कमान सौंपे जाने से इस बार कांग्रेस की सीटें बढ़कर 85 से 100 तक पहुंच जाएंगी।

चैतन्य भविष्य जिज्ञासा शोध संस्थान के संचालक आचार्य पंडित राज ने दावा किया कि चंद्र-मंगल की युति व ग्रहों के राजा सूर्य के तुला राशि से वृश्चिक राशि में प्रवेश करने से भारतीय जनता पार्टी को मतदाताओं का सीधा लाभ मिल रहा है। 16 नवंबर को सूर्य के राशि परिवर्तन से भाजपा को 117 से 125 सीटें प्राप्त कर मध्यप्रदेश में तीसरी बार सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि 10 साल से वनबास काट रही कांग्रेस पार्टी को भी इस बार 2008 में मिली 71 सीटों की तुलना में 20 से 30 सीटों का फायदा मिलेगा। कांग्रेस को इस बार 90 से 100 सीटें मिलेंगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंन्द्र का कहना है कि यही मतदान अगर 25 नवंबर की तुलना में 15 नवंबर के आसपास होता तो कांग्रेस को 140 से 145 सीटें मिल सकती थीं। क्योंकि तुला राशि का सूर्य सत्तासीन सरकार के लिए लाभदायक नहीं होता। चूंकि सूर्य के वृश्चिक राशि में प्रवेश होने से इसका लाभ भाजपा सरकार को मिलेगा। भाजपा को इस बार 120 से 125 सीटें मिलेगी जबकि कांग्रेस 85 से 95 सीटों तक सिमट कर रह जाएगी।

ज्योतिषाचार्य पंडित विष्णु राजौरिया के अनुसार चंद्र, मंगल व सूर्य के प्रबल योग से सत्तासीन भाजपा सरकार तीसरी बार सरकार बनाकर आम लोगों के लिए जनकल्याणकारी योजनाएं बनाएगी। उन्होंने कहा कि  हालांकि कांग्रेस इस बार विपक्ष की भूमिका आक्रमक रूप में अपनाएगी जिससे नई सरकार को कई बार दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लेकिन अंततोगत्वा सरकार अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी।

सोमवार, 28 अक्तूबर 2013

मोटापा भी है ब्रेस्ट कैंसर का कारण


अक्टूबर माह विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्तन कैंसर जागरुकता माह के रूप में मनाया जाता है। पिछले कुछ सालों में महिलाओं में स्तन कैंसर तेजी से बढ़ा है। हमारे देश में एक लाख महिलाओं में 25 को स्तन कैंसर होता है। स्तन कैंसर आज विश्व में महिलाओं में होने वाला प्रमुख कैंसर होने के अलावा कैंसर से मृत्यु का भी प्रमुख कारण है। किसी भी महिला के जीवन में स्तन कैंसर होने की संभावना आठ में से एक होती है।

स्तन कैंसर के साथ-साथ कुछ अन्य व्याधियां/आदतें भी महिलाओं में बढ़ी हैं और इसका कारण मानी जाने लगी हैं । खान-पान में आये बदलाव व व्यस्त जीवन शैली के चलते मोटापा बढ़ा है । शिक्षा व नौकरी के कारण बच्चे 30 साल की उम्र के बाद होते हैं अथवा नहीं होते हैं । बच्चों को स्तनपान नहीं कराया जाता है । शराब का चलन भी महिलाओं में पिछले कुछ सालों में बढ़ा है ।

स्तन कैंसर के कारण एवं इसके समय से पहले पता करने के तरीकों के प्रति जानकारी नहीं होने के कारण हमारे देश में अधिकतर महिलाएं इलाज के लिए देरी से आती हैं। विकसित देशों में 20 साल की उम्र से लड़कियों को स्तन का स्व-परीक्षण सिखा दिया जाता है जो वे माह में एक बार जीवन पर्यन्त करती हैं। 40 साल की उम्र से हर महिला साल में एक बार मेमोग्राफी करवाती है जिससे 85 प्रतिशत तक कैंसर आरंभिक अवस्था में ही पकड़ में आ जाता है और इससे इन देशों में स्तन कैंसर मृत्युदर में 25 फीसदी कमी आई है।

गंभीर बीमारियों को आमंत्रण

हमारे देश में मोटापा पिछले दो दशकों में बढ़ा है। मोटापा कई बीमारियों को जन्म देता है जिसमें मधुमेह, हृदय रोग, लकवा, गुर्दे के रोग एवं नॉन-एल्कोहोलिक फेटी लीवर प्रमुख हैं। मोटापे से होने वाली इन बीमारियों से समय पूर्व मृत्यु भी बढ़ी है। पिछले कुछ सालों में ये पता चला है कि मोटापे से कई प्रकार के कैंसर व उनसे मृत्यु का खतरा भी बढ़ता है। मोटापे से संबंधित महिलाओं में होने वाले कैंसरों में स्तन कैंसर के अलावा कोलन, ओवरी, यूटरस के एण्डोमेट्र्यिम, इसोफेगस, गाल ब्लेडर, पेनक्रियाज व थायरॉयड के कैंसर प्रमुख हैं। मोटापा अधिक होने के कारण यह बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं।

बॉडीमास इंडेक्स
मोटापे को बीएमआई बॉडीमास इंडेक्स से जाना जाता है। जिनका बीएमआई  25 से अधिक है उनमें ये कैंसर होने का खतरा अधिक होता है। मोटापे के कारण ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा पोस्ट मेनोपोजल महिलाओं मेें अधिक रहता है और ये आमतौर पर हारमोन पॉजिटिव कैंसर होता है। अगर बीएमआई 25 से 5 यूनिट बढ़ती हैं तो स्तन कैंसर का खतरा इन महिलाओं में 33 प्रतिशत अधिक बढ़ जाता है। ये खतरा हर 5 यूनिट बीएमआई के साथ इसी अनुपात में बढ़ता जाता है। जिससे रोग बढ़ता है।

एस्ट्र्रोजन का स्तर
मोटापे के कारण इन महिलाओं के शरीर में मेनोपॉज के बाद भी एस्र्टेजन का स्तर अधिक बना रहता है। साथ ही इन महिलाओं में एन्र्डेजन्स की मात्रा भी अधिक रहती है। इन दोनों का बढ़ा हुआ स्तर इन महिलाओं में स्तन कैंसर का कारण बनता है। मोटी महिलाओं में मधुमेह के साथ ही रक्त में इन्सुलिन की मात्रा अधिक रहती है। ये बढ़ा हुआ इन्सुलिन कोशिकाओं को अनियंत्रित होकर बढऩे में मदद करता है इसीलिए मधुमेह की रोगी महिलाओं में मोटापा और स्तन कैंसर अधिक पाया गया है। हाल के वर्षों में ये भी सामने आया है कि मधुमेह के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा मेटफोरमिन रक्त में इन्सुलिन के स्तर को कम करने के साथ-साथ पोस्ट मेनोपॉजल महिलाओं में स्तन कैंसर की आशंका भी कम करती है।

प्री-मेनोपॉजल
मोटापे से समय पूर्व मृत्यु की आशंका भी अधिक रहती है। साथ ही इन महिलाओं में स्तन कैंसर के दोबारा होने व स्तन कैंसर से मृत्यु की अधिक आशंका रहती है एवं ये कम समय ही जीवित रह पाती हैं। रिकरेंस एवं मृत्यु की आशंका पोस्ट मेनोपॉजल महिलाओं में ही नहीं अपितु प्री-मेनोपॉजल मोटी महिलाओं में अधिक पाई गई है। चंूकि वजन घटाया जा सकता है इसलिए खान-पान में बदलाव व व्यायाम से स्तन कैंसर की आशंका कम करने के साथ ही, इलाज के बाद लम्बे जीवन की कल्पना की जा सकती है। अभी तक डॉक्टर वजन न बढऩे की सलाह देते थे किन्तु हाल ही में पता चला है कि इन महिलाओं में इलाज के बाद बिना परेशानी के वजन कम किया जा सकता है। इन महिलाओं में प्रतिदिन 500-1000 कैलोरी कम करने से एवं फैट की मात्रा खाने की कुल केलोरीज की 20 प्रतिशत तक सीमित कर देने से वजन कम करना संभव है। साथ ही खाने में सब्जी व फलों के अधिक उपयोग एवं सप्ताह में 150 मिनट के व्यायाम से 6 महीने में 3 से 4 किलो तक वजन कम किया जा सकता  है। हाल के वर्षों में स्तन कैंसर के उपचार के बाद महिलाओं में वजन कम करने से महिलाओं का ओवरऑल सर्वाइबल काफी बढ़ा है।

दिनचर्या व खान-पान पर दें ध्यान
मोटापा स्तन कैंसर करने के साथ ही, उपचार उपरांत स्तन कैंसर करने व जीवन अवधि भी कम करता है। अत: दिनचर्या एवं खान-पान में सकारात्मक बदलाव कर वजन कम करने से स्तन कैंसर की आशंका कम की जा सकती है। स्तन कैंसर के इलाज के बाद भी महिलाओं को वजन कम करना चाहिए जिससे कैंसर मुक्त लम्बा जीवन जी सकें। समस्या होने पर अपने चिकित्सक से राय लेकर या कैंसर हॉस्पिटल में परामर्श लेकर इलाज कराएं।

डॉ. सुनील कुमार
कंसलटेंट
मेडिकल आंकोलॉजी
जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र, भोपाल